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ये भी ख़ुदकुशी है, वक्त हो तो पढ़ लीजियेगा और लोगों को पढ़ा भी दीजियेगा

सुशांत सिंह राजपूत की ख़ुदकुशी के बाद मेरे आस-पास हर जगह बस वही खबर तैरती नजर आ रही थी.
पर इसी बीच अलीगढ के मोजो संवादाता हिमांशु सिंह ने मोजो के यूपी ग्रुप में एक खबर अपडेट की.
ये खबर भी एक ख़ुदकुशी की थी, एक ख़ुदकुशी जिसके बाद समझ आया कि भूख आपको सिर्फ शारीरिक नहीं मानसिक प्रताड़ना भी देती है.
अलीगढ के इस ऑटो चालक की ख़ुदकुशी खबर आपको झकझोर कर रख देगी.

आखिर क्या है पूरा मामला

देश में जारी कोरोना संकट के कारण कई लोगों का रोजगार छिन गया है. हजारों की कमाई करने वाले आज भूखे मरने को मजबूर हैं. इसी कड़ी में आर्थिक तंगी के शिकार एक ऑटो ड्राइवर ने बिहार की राजधानी पटना में खुदकुशी कर ली। यही हालत मध्य प्रदेश में भी दिखाई दे रही है लोगो के पास रोजगार नहीं है सर पर बारिश लगी हुई है मध्य प्रदेश सरकार फेल हो चुकी है सिर्फ कागजों में रोगजर दिया जा रहा है घोसडाओ में रोजगार दिया जा रहा है और अब तो माध्यम वर्ग की हालत इतनी गंभीर है कि जाकर खुद सरकार पूछे तो पता चलेगा सरकार ने गरीबों की मदद की जो सरकार से हो सका पर माध्यम वर्ग की कोई सरकार सुध नहीं ली आज माध्यम वर्ग बैंको से लोन लिया है व्यापारियों से लोन लिया है क्रेडिट में जिंदगी गुजर बसर कर अपनी इज्जत बचा रहा था पर करोना ने आज माध्यम वर्ग का सब छीन लिया है। सरकार का कोई ध्यान नहीं क्या माध्यम वर्ग हमेशा आत्मनिर्भर रहा उसने खुद ही अपने दम से वा बैंको से कर्ज लेकर आत्मनिर्भर बना पर आज इस संकट की घड़ी में सरकारों ने भी अपना हाथ खींच लिया है क्या यही होना चाहिए माध्यम वर्ग आज मौत के मुहाने में खड़ा है । जिसका कोई जिम्मेदार नहीं आज माध्यम वर्ग सरकार की तरफ देखा रहा है बैंको की किस्त कैसे भरेगे आज एक दिन का घर खर्च कैसे चलाए।
देश में जारी कोरोना संकट के कारण कई लोगों का रोजगार छिन गया है. हजारों की कमाई करने वाले आज भूखे मरने को मजबूर हैं. इसी कड़ी में आर्थिक तंगी के शिकार एक ऑटो ड्राइवर ने बिहार की राजधानी पटना में खुदकुशी कर ली. शहर के बाहरी इलाके शाहपुर में रहने वाले ऑटो ड्राइवर के परिवार वालों ने बताया कि, ‘उसने अपने ऑटो को चलाकर पैसे जुटाने के लिए संघर्ष किया, लेकिन वह विफल रहा. इसके अलावा वह दिहाड़ी का काम ढूंढने में भी असमर्थ रहा. उन्होंने बताया कि उसने लोन लेकर ऑटो खरीदा था और लॉकडाउन के कारण बीते तीन महीनों से उसकी किस्त चुकाना भी मुश्किल हो गया था.
जब भी एन पी न्यूज़ नेशन के चीफ ने उनके पिता से मुलाकात की और उनसे उन कठिनाइयों के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि लाख कोशिशों के बावजूद आज तक हमलोगों का राशन कार्ड भी नहीं बना. हालांकि ऑटो ड्राइवर की खुदकुशी की खबर अधिकारियों तक पहुंचने के बाद पटना जिला मजिस्ट्रेट कुमार रवि 25 किलो चावल और गेहूं के साथ आज पीड़ित परिवार के घर पहुंचे. मृतक ने अपने पीछे तीन बच्चों को छोड़ा है।
25 साल के इस ऑटो ड्राइवर की मौत ने एक बार फिर बिहार में बेरोजगारी को फोकस में ला दिया है. इस सप्ताह विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर ‘बेरोजगारी जैसे वास्तविक मुद्दों’ पर ध्यान केंद्रित करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए हमला बोला था. तेजस्वी यादव ने कहा था, ‘नीतीश कुमार और भाजपा को वास्तविक जमीनी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. इससे बिहार को मदद मिलेगी. वहीं, थिंक-टैंक (सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी) के अनुसार बिहार में बेरोजगारी दर मई 2020 तक 46.2 प्रतिशत है।
पिछले महीने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उद्योगपतियों से राज्य में इकाइयां स्थापित करने और वहां पहले से रह रहे लाखों बेरोजगार पुरुषों और महिलाओं के साथ-साथ लॉकडाउन के दौरान घर लौटने वाले लाखों प्रवासियों को रोजगार देने का आग्रह किया था. बता दें बिहार में कोरोनावायरस के कहर से अब तक 39 लोगों की जान जा चुकी है और अब तक 6400 से ज्यादा लोग संक्रमित हैं।
केंद्र सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए कई फैसले किए गए हैं और उसी कड़ी में बिहार में भी देश के बाकी हिस्सों की तरह वाणिज्यिक गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से खोला जा रहा है।
बता दें कि केंद्र सरकार की तरफ से 8 जून से पूजा स्थलों, होटल-रेस्तरां और शॉपिंग मॉल्स को शर्तों के साथ फिर से खोलने की अनुमति दी गई है. ऑटो और ई-रिक्शा को भी संचालित करने की अनुमति दी गई है, लेकिन यात्रियों की संख्या तय की गई है. हालांकि उन्हें कन्टेन्मेंट जोन में चलने की इजाजत नहीं दी गई है।

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