गोष्ठी कर हेपेटाइटिस के प्रति किया जागरूक, टीकाकरण से ही हेपेटाइटिस का बचाव- डॉ प्रभात वर्मा

कायमगंज/फर्रुखाबाद। हेपेटाइटिस एक जानलेवा बीमारी है, जिसके प्रति जागरूकता की काफी कमी है। विश्वभर में हेपेटाइटिस के बढ़ते मामलों को देखते हुए हर वर्ष 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। ताकि इसके बारे में जागरूकता फैलाई जा सके। हेपेटाइटिस दिवस 2020 की  थीम ‘हेपेटाइटिस मुक्त भविष्य है। इसी क्रम में मंगलवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र  कायमगंज में कोविड 19 के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए एक गोष्ठी व जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कायमगंज के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ अनुराग वर्मा ने बताया कि खून की सामान्य जांच से हेपेटाइटिस ‘बी’ और ‘सी’ का पता लगाया जा सकता है, क्योंकि मरीज में शुरुआती लक्षण न दिखने के कारण इस बीमारी का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। दोनों वायरस के संक्रमण का कोई लक्षण न होने के कारण गंभीर स्थिति में ही बीमारी का पता चलता है। जब मरीज को बीमारी का पता चलता है तो उसे लिवर सिरोसिस या फिर लिवर कैंसर हो चुका होता है। ऐसी स्थिति में मरीज को लिवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। डॉ बर्मा ने बताया कि लिवर ट्रांसप्लांट के लिए आने वाले अधिकतर मरीजों में बीमारी का कारण हेपेटाइटिस सी है। इस बीमारी के शुरुआती लक्षण नहीं दिखते, इसीलिए संक्रमण का पता लगाने के लिए आमतौर पर लोग कोई जांच नहीं कराते। ऐसे में ये संक्रमण छिपा रह जाता है। इस संक्रमण के हाईरिस्क ग्रुप में संक्रमित मां से बच्चे, चिकित्सा पेशे से जुड़े लोग, ऐसे मरीज जिन्हें रक्त चढ़ाया गया हो, सिरिंज से ड्रग लेने वाले आते हैं। इसलिए संक्रमण का पता लगाने के लिए स्क्रीनिंग सबसे जरूरी है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ प्रभात वर्मा ने बताया कि  बच्चे  को जन्म के तुरंत बाद ही हेपेटाइटिस का टीका लगाया जाता है। अस्पताल  से  छुट्टी  मिलने से पहले ही यह टीका दियाजाता है।इसके  अलावा  पेंटा  में  भी हेपेटाइटिस का टीका होता है। जो डेढ़ माह, ढाई माह और साढ़े तीन माह पर दिया जाता है। संस्थागत प्रसवहोने की स्थिति में तो हेपेटाइटिस का टीका लग जाता है लेकिन किसी वजह से यदि प्रसव संस्थागत न हुआ हो तो हेपेटाइटिस के टीके के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 4 के अनुसार जनपद में 12 से 23 माह के कुल 41.7 प्रतिशत बच्चों को हेपेटाइटिस के टीके लगाये गए हैं। इस दौरान डॉ शिव प्रकाश, डॉ गौरव मिश्र, बीपीएम मोहित गंगवार, बीसीपीएम विनय मिश्र और स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता मौजूद रहे ।

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